जीवन स्वप्नों सा बहता है
आज नया दिन
अग्नि समेटे निज दामन में
उगा गगन में अरुणिम सूरज
भर उर में सुर की कोमलता
नये राग छेड़े कोकिल ने
भीगी सी कुछ शीतलता भर
नई सुवास हवा ले आयी
मंद स्वरों में गाती वसुधा
पल भर में हर दिशा गुँजाई
उड़ी अनिल सँग शुष्क पत्तियां
कहीं झरे पुहुपों के दल भी
तिरा गगन में राजहंस इक
बगुलों से बादल के झुरमुट
नीला आसमान सब तकता
माँ जैसे निज संतानों को
जीवन स्वप्नों सा बहता है
भरे सुकोमल अरमानों को...














