मंज़िल और रास्ते
जिसने जाना, जो भी जाना
वह कहा नहीं जा सकता
जो कहा गया है
वह मार्ग की खबर देता है
मंज़िल की नहीं
वहाँ तो ख़ुद ही जाना होता है
कोई चल सकता है जिस मार्ग पर
वही सौंपा जाता है
अस्तित्त्व के द्वारा
हरेक का मार्ग उसका अपना है
भाग्य भी उसका साथ देता है
जो चल पड़ा है
उसका नहीं
जो अभी सोच में ही पड़ा है
या रास्ते पर ही खड़ा है
औषधि है हर रोग की यहाँ
इलाज हर किसी का होता है
भगोड़ा बन गया जो जीवन से
वह बार-बार उसे खोता है !

कर्म से जीवन की सार्थकता है ,बहुत सुन्दर और सार्थक चिन्तन ।
जवाब देंहटाएंस्वागत व आभार मीना जी!
हटाएंआपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में शनिवार 20 जून, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत आभार दिग्विजय जी!
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