मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

बुधवार, जून 17

मंज़िल और रास्ते

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मंज़िल और रास्ते जिसने जाना, जो भी जाना  वह कहा नहीं जा सकता  जो कहा गया है  वह मार्ग की खबर देता है  मंज़िल की नहीं  वहाँ तो ख़ुद ही जाना ह...
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रविवार, जून 14

दुख की तुम गाथा सुनाते

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दुख की तुम गाथा सुनाते दो दिनों के बीच में इक रात आती  रात का तुम ज़िक्र करते  दिन तुम्हारे पास था  दिन कभी गाया नहीं ! दो सुखों के बीच था इ...
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शुक्रवार, जून 12

भुला दिया है

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भुला दिया है  देह एक नाव है  मुझ नदी में तैरती हुई  जो अनंत काल से, अनंत देश के पार बह रही है  मैं नाव नहीं हूँ,    नदी हूँ, पर यह भुला दिया...
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मंगलवार, जून 9

सपनों का संसार

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सपनों का संसार   वृद्ध हो जाता है इंसान पर जलती रहती है  कामना की आग  वैराग्य नहीं सधता  अब वृद्ध जनों को  यात्रा जगत की चलती रहती है  जहाँ ...
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शनिवार, जून 6

चिंगारी प्रेम की

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  चिंगारी प्रेम की  प्रेम कविताएँ और कहानियाँ  पढ़ी जाती हैं, रची जाती हैं, सुनायी जाती हैं  क्योंकि प्रेम की जो नन्हीं सी चिंगारी  छिपी है ...
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गुरुवार, जून 4

ग्लेशियर पिघल रहे हैं

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ग्लेशियर पिघल रहे हैं  धरती के दोनों ध्रुवों पर पर बसने वाले  छोटे-छोटे मुल्कों को  झेलनी पड़ रही है सजा  उस जुर्म की, जो उन्होंने किया ही न...
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बुधवार, जून 3

सीधे सच्चे - कुछ दोहे

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सीधे सच्चे - कुछ दोहे जीवन इक पहेली है,  बूझ ले सो ज्ञानी सपनों सा संसार है, आँख खुलते फानी   हवा, धूप, माटी, गगन,  या अनल की मूरत अंतर में...
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सोमवार, जून 1

निजता

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निजता  किसी को, कुछ और नहीं होना है  जो, जो है, वही होकर, स्वयं को संजोना है  गुलाब, गुलाब रहकर ही महकेगा  कमल जल में ही चहकेगा  निजता को पह...
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गुरुवार, मई 28

पहली मंज़िल पर बाढ़

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पहली मंज़िल पर बाढ़  अचानक नहीं आयी थी वर्षा  सुबह से बादल बने थे  दे दी थी चेतावनी  मौसम विभाग ने पिछले ही हफ़्ते  भले-चंगे घर में बैठे थे ...
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सोमवार, मई 25

छूट गयी जब “मैं”

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छूट गयी जब “मैं” छूट गयीं सहज  सारी व्यस्तताएँ छूट गयी जब मैं, सारे जहान का समय  अब जैसे हाथों में आ गया छूट गयी जब मैं ! कुछ भी करने को नही...
8 टिप्‍पणियां:
शनिवार, मई 23

तेरा-मेरा भेद हुआ कब

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तेरा-मेरा भेद हुआ कब  तू सिंधु, मैं बूँद हूँ तेरी  तू सूरज मैं किरण सुनहरी,  तू संपूर्ण समष्टि, मैं व्यष्टि  तू बोध विशुद्ध हूँ मैं दृष्टि !...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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