गुरुवार, जुलाई 16

नदिया बहती जाये

नदिया बहती जाये 


यादों के कुछ कंकर 

तलहट में सिमटे हैं, 

हर पल वह नयी हुई 

बतिया कहती जाये !


नदिया बहती जाये ! 


 कल भी तो यह तट था 

स्मृतियाँ पुरानी हुईं , 

इस पल में देखो हर

पर्यय सहती जाये ! 


नदिया बहती जाये ! 


अब क्यों वे घाव चुभें 

पाहन के लहरों को,

घिस-घिस सुडौल होते 

सैकत रहती जाये !


नदिया बहती जाये !

 

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