मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

शुक्रवार, अक्टूबर 16

प्रेम

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प्रेम  प्रेम - आत्मा के फूल की सुगंध ! जो कभी एक बीज था  अपने आप में सिमटा  ऊर्जा भीतर छिपाये   मिटकर बीज ही  एक दिन फूल उगाये !  प्रेम - जब...
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बुधवार, अक्टूबर 14

अहंकार का भोजन दुख है

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अहंकार का भोजन दुख है  माँ की कृपा से कटती माया  राग-द्वेष के बंधन काटे,  ऊँची-नीची लहरों में भी समता का इक कमल खिला दे ! सत् चित् आनंद स्वर...
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सोमवार, अक्टूबर 12

जग के भीषण कोलाहल में

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जग के भीषण कोलाहल में  देवी माँ हर उर में बसतीं  निर्मल,मृदुल प्रेरणा भरतीं,  जग के भीषण कोलाहल में  अति धीरज से मार्ग दिखातीं ! शक्ति का को...
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बुधवार, अक्टूबर 7

मानो उसने चुरा लिया उर

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मानो उसने चुरा लिया उर  खोज सही पर दिशा ग़लत है  इक तलाश हर दिल में जारी,    भरे हवा को ज्यों मुट्ठी में व्यर्थ जा रही कोशिश सारी ! चाहत जिस...
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शनिवार, अक्टूबर 3

खोकर ही पा सकता कोई

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खोकर ही पा सकता कोई  अपने भीतर उतर सको तो  स्वाद स्वयं का अगर छको तो,  अंत नहीं पाओगे उसका  मन-राहों से गुजर सको तो ! मीठी-मीठी सी इक पीड़ा ...
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सोमवार, सितंबर 28

मौसम का उल्लास समेटे

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मौसम का उल्लास समेटे घन घन घन घन मेघ गरजते टिप टिप टिप टिप झरतीं बूँदें, पारिजात, कंचन, कनेर मिल भीग रहे सरसाएं झूमें ! गगन सलेटी, पवन नश...
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शुक्रवार, सितंबर 25

ॐ शांति ! शांति !! शांति !!!

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ॐ शांति ! शांति !! शांति !!!  भीतर साधें शांति, संतुलन    हो गतिमय बाहर का जीवन,   ज्यों शिव शांत रहें अंतर में  बाहर करते तांडव नर्तन ! ज्य...
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मंगलवार, सितंबर 22

एक गीत

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एक गीत    झूठे-झूठे सपने, झूठे-झूठे वादे मन ख़ुद से करता है  सच्ची-सच्ची बातों, सच की राहों  से शायद डरता है ! सच की ज्योति जली जो भीतर  उसस...
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शनिवार, सितंबर 19

वही वही

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आकाश  एक वही अनंत आकाश   झरता है जिसमें से परम प्रकाश  वही आश्रय है हमारा  उपजे उसी से  उसी में समा जाएँगे  कुछ पल डोलेंगे यहाँ  इंद्रधनुष क...
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सोमवार, सितंबर 14

भारत माँ के भाल की बिंदी, अपनी प्यारी हिन्दी

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भारत माँ के भाल की बिंदी  अपनी प्यारी हिन्दी  भाषा किसी भी राष्ट्र की पहचान होती है. वह राष्ट्र की एकता, अखंडता तथा विकास में महत्वपूर्ण भू...
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शनिवार, सितंबर 12

लोक चेतना में बसते हैं

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गणपति उत्सव  श्रीगणेश कारण हैं सबके  मिट्टी, गोबर से भी रच लो,  दूर्वा का तिनका कर अर्पण   छोटा सा मोदक ही धर दो ! बहुत सरल, शुभता के दाता  ...
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बुधवार, सितंबर 9

गणेश पूजा

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गणेश पूजा  फिर आयेंगे गणपति  कुछ दिनों के लिए  घर बन जाएँगे मंदिर  सुबह-शाम आरती के गूँजेंगे स्वर  बूढ़े बन जाएँगे बच्चे  बच्चे कुछ समझदार  ...
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सोमवार, सितंबर 7

प्रेम

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प्रेम  कुछ भी नहीं जानते हम  जब यह जान लेते हैं,  जो भी हो चुका  वह पूर्व निर्धारित था  जो होने वाला है  वह है अभी हमारे हाथ में  यह मान लेत...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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