मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

मंगलवार, जून 9

सपनों का संसार

›
सपनों का संसार   वृद्ध हो जाता है इंसान पर जलती रहती है  कामना की आग  वैराग्य नहीं सधता  अब वृद्ध जनों को  यात्रा जगत की चलती रहती है  जहाँ ...
8 टिप्‍पणियां:
शनिवार, जून 6

चिंगारी प्रेम की

›
  चिंगारी प्रेम की  प्रेम कविताएँ और कहानियाँ  पढ़ी जाती हैं, रची जाती हैं, सुनायी जाती हैं  क्योंकि प्रेम की जो नन्हीं सी चिंगारी  छिपी है ...
12 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, जून 4

ग्लेशियर पिघल रहे हैं

›
ग्लेशियर पिघल रहे हैं  धरती के दोनों ध्रुवों पर पर बसने वाले  छोटे-छोटे मुल्कों को  झेलनी पड़ रही है सजा  उस जुर्म की, जो उन्होंने किया ही न...
8 टिप्‍पणियां:
बुधवार, जून 3

सीधे सच्चे - कुछ दोहे

›
सीधे सच्चे - कुछ दोहे जीवन इक पहेली है,  बूझ ले सो ज्ञानी सपनों सा संसार है, आँख खुलते फानी   हवा, धूप, माटी, गगन,  या अनल की मूरत अंतर में...
7 टिप्‍पणियां:
सोमवार, जून 1

निजता

›
निजता  किसी को, कुछ और नहीं होना है  जो, जो है, वही होकर, स्वयं को संजोना है  गुलाब, गुलाब रहकर ही महकेगा  कमल जल में ही चहकेगा  निजता को पह...
12 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, मई 28

पहली मंज़िल पर बाढ़

›
पहली मंज़िल पर बाढ़  अचानक नहीं आयी थी वर्षा  सुबह से बादल बने थे  दे दी थी चेतावनी  मौसम विभाग ने पिछले ही हफ़्ते  भले-चंगे घर में बैठे थे ...
14 टिप्‍पणियां:
सोमवार, मई 25

छूट गयी जब “मैं”

›
छूट गयी जब “मैं” छूट गयीं सहज  सारी व्यस्तताएँ छूट गयी जब मैं, सारे जहान का समय  अब जैसे हाथों में आ गया छूट गयी जब मैं ! कुछ भी करने को नही...
8 टिप्‍पणियां:
शनिवार, मई 23

तेरा-मेरा भेद हुआ कब

›
तेरा-मेरा भेद हुआ कब  तू सिंधु, मैं बूँद हूँ तेरी  तू सूरज मैं किरण सुनहरी,  तू संपूर्ण समष्टि, मैं व्यष्टि  तू बोध विशुद्ध हूँ मैं दृष्टि !...
11 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, मई 21

असली घर है रिक्त आकाश

›
असली घर है रिक्त आकाश घर की चिंता करते करते  समय और शक्तियाँ लगायी,  साथ नहीं जाने वाला है  धोखा देगा, पड़े सुनायी ! दीवारों से नहीं बना है ...
8 टिप्‍पणियां:
बुधवार, मई 20

चंदा की आभा में कैसा यह हास जगा

›
चंदा की आभा में कैसा यह हास जगा     मानस की घाटी में, श्रद्धा का बीज गिरा मनीषा  की डाली पर, शांति का पुष्प उगा, अंतर की सुरभि से, जीवन का ढ...
9 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, मई 19

अभी और यहाँ

›
अभी और यहाँ  क्या तुम हो?  हाँ, इससे कौन इंकार करेगा  अपना होना तो सबने जाना है ! क्या तुम यहाँ हो ? इसमें शक है  तुम कहीं भी हो सकते हो  चं...
8 टिप्‍पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.