मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

शनिवार, अप्रैल 18

कितनी बार धरा पर आये

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कितनी बार धरा पर आये योग वशिष्ठ पर आधारित  इस ब्रह्मांड में परम अनंत, एक बस रहा जानें इसको राम ने छोटी सी आयु में, पहचाना इसी असलियत को ! मु...
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गुरुवार, अप्रैल 16

आँगन में उतरा हो जैसे

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आँगन में उतरा हो जैसे साँझ-सवेरे जब उपवन में, पंछी गाये पीहू-पीहू   आँगन में उतरा हो जैसे, फूला, खिला बोहाग बीहू ! आया बसंत, हर मन उत्सुक, स...
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मंगलवार, अप्रैल 14

अम्बेडकर जयंती पर शुभकामनाएँ

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अम्बेडकर जयंती पर शुभकामनाएँ  धर्म वही, जो आज़ादी दे  भेदभाव ह्रदय से, मिटा दे,   परम पाठ बंधुत्त्व का सिखा  झूठी हर दीवार गिरा दे ! मेधा का...
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सोमवार, अप्रैल 13

बैसाखी की आत्मा

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बैसाखी की आत्मा  फसल पक गई जब खेतों में  बगिया में रस घट भर आये,  मधुर पताशों की लज्जत  का  सुमिरन अंतर में हो आये ! खालिस शिष्य बनाये इस दि...
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शनिवार, अप्रैल 11

हल्का होकर उड़े गगन में

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हल्का होकर उड़े गगन में  ख़ुदबुद करती रही चेतना  धक-धक करता रहा हृदय यह, उठतीं-गिरती रहतीं लहरें  लिप्सा कभी, कभी छाया भय ! कितनी चट्टानें थ...
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गुरुवार, अप्रैल 9

भव सागर का कूल किनारा

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भव सागर का कूल किनारा  परम एक था ! निपट अकेला  उपजा जिससे जगत पसारा,   ढूँढ रहा हर कोई जिसमें  भव सागर का कूल किनारा !   दिखता नहीं दूसरा को...
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मंगलवार, अप्रैल 7

माना अभी दूर जाना है

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माना अभी दूर जाना है कितनी पूनम जागेंगे हम कितने सूरज और देखने,   छुपा गर्भ में यह भावी के किंतु सजा सकते हैं सपने ! वर्तमान की कोख से उपज  ...
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रविवार, अप्रैल 5

मेरे लेखन सफर की नई प्रस्तुति — ‘एक जीवन एक कहानी’ (खंड 1.0 और 2.0)

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``` मेरे लेखन सफर के एक खास पल को आप सभी के साथ साझा कर रही हूँ 🌿 मेरी हाल ही में प्रकाशित दो कित...
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शुक्रवार, अप्रैल 3

नयी भोर की आस जग रही

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नयी भोर की आस जग रही दिल में कैसी फांस गड़ रही  अंतर का जो चैन हर रही,  अब अतीत का गट्ठर फेंको  नयी भोर की आस जग रही ! मानवता फिर सिसक रही ह...
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बुधवार, अप्रैल 1

जग इक अनुभव

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जग इक अनुभव  उर की सरिता बहती जाये  सागर से यह कहती जाये,  तेरा-मेरा साथ पुराना  तुझसे हुई, तू ही बुलाये ! आना सुख था, जाना भी है  किया पसार...
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रविवार, मार्च 29

जाने कब फिर मिलना हो

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जाने कब फिर मिलना हो   कुछ तुम कह दो, कुछ हम सुन लें कलियों का कब तक खिलना हो जाने कब फिर मिलना हो !   चंद श्वास लेकर आये थे कुछ ही शेष रही ...
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बुधवार, मार्च 25

प्रेम रहेगा कैसे मन में

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प्रेम रहेगा कैसे मन में जब ना कोई घर में रहता   तब चुपके से कान्हा आता,  नवनीत चुरा मटका तोड़े  गोपी का हर दुख मिट जाता ! द्वार खुला ही छोड़...
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सोमवार, मार्च 23

वासंतिक नवरात्र आ गये

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वासंतिक नवरात्र आ गये  माँ के आने की बेला है  घर में मंगल कलश बिठाओ, धूप-दीप, फूलों से स्वागत    द्वारे बंदनवार सजाओ !  माँ जो भीतर कण-कण मे...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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