गुरुवार, अगस्त 6

माँ और मानव

माँ और मानव  

प्रेम और ज्ञान के तन्तुओं से 

बनी माँ शारदे 

शांति और सुख से भरी

शक्ति अपार धारे 

माँ दुर्गा 

निमग्न आनंद में 

बगिया सी हरी

पुनीता लक्ष्मी ! 


उत्साह कण-कण में समोये 

उदार व तृप्त सदा 

सृजनशील, अभय देती   

कृतज्ञ और सजग 

फूल सी खिली 

ईश्वरी ! 


उनकी ओर हो अपना प्रयाण 

जानें उन्हें और पाएँ वरदान 

मानव ह्रदय की 

यही तो उपलब्धि है 

अंतर में अभाव नहीं 

पूर्ण समृद्धि है !

 


5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत पवित्र भाव लिए सुंदर रचना।
    सादर।
    -------
    जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार ७ अगस्त २०२६ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

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  2. अंतर में अभाव नहीं
    सुन्दर रचना

    जवाब देंहटाएं