शुक्रवार, अगस्त 28

रक्षाबंधन पर हार्दिक शुभकामनाएँ

रक्षाबंधन पर हार्दिक शुभकामनाएँ 



सावन के पूनम की बेला, संग लायी यादों का मेला

न केवल धागा कलाई पर, बँधता स्नेह,विश्वास निराला !


कभी समरभूमि में बहन ने, जय-तिलक संग राखी बाँधी 

 कभी संकट में इक पुकार पर, रिश्तों ने मर्यादा साधी !


इतिहास के पन्नों में मिलती, त्याग और साहस की कथाएँ

 राखी की कच्ची डोरी ने, गढ़ डालीं कितनी गाथाएँ ! 


रक्त बहा कृष्ण की उँगली से, द्रौपदी ने आँचल फ़ाड़ा

उस छोटे से इक टुकड़े ने, दिया स्नेह का ऋण अनंत बढ़ा  !

 

पर्व नहीं बस भाई-बहन का, मानवता का परम उत्सव है

 जहाँ सुरक्षा के संग सदा, सम्मान का शुभ संकल्प है !


आज भले समय बदला है, बदल गई जीवन-परिभाषा,

 पर राखी कहती चुपके से, प्रेम ही है जीवन की भाषा !


बहन की आँखों में विश्वास, भाई के मन सम्मान रहे,

 हर नारी निर्भय हो जीए, हर घर में प्रेम का मान रहे !


आओ, इस बार राखी पर, सूत नहीं दिल भी बाँधें

 भेदभाव की तोड़ दीवारें, मानवता के रिश्ते साधें !


राखी का धागा कच्चा है ,भाव अगर सच्चा हो जाए,

 तो  छोटी-सी प्रेम-गाँठ से, सारा जग अपना हो जाए !

रक्षा केवल रिश्तों की नहीं,संस्कारों, सम्मान की भी हो;


 राखी का है यही संदेश, हर इक मन में अपनापन हो !

 

8 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत प्यारी रचना। पर राखी कहती चुपके से, प्रेम ही है जीवन की भाषा ! - ये लाइन सबसे अच्छी लगी

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  2. इस रचना में बहुत ही सुंदर स्नेहिल भाव निहित है
    ढ़ेरों शुभकामनाएँ।

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  3. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर रविवार 30 अगस्त 2026 को लिंक की गयी है....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!


    !

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