मधुर याद बनकर रह जाते
महाशून्य में जो खो जाते
मधुर याद बनकर रह जाते !
जीवन रण में विजय मिली, पर
हो आहत जो बाट जोहते,
कालदेव अंतिम पीड़ा हर
हर बंधन से मुक्ति दिलाते !
छोड़ जगत यह वापस जाते
मधुर याद बनकर रह जाते !
जग मेले में आकर मिलते
सँग-सँग खुशियां सोग बांटते,
इक दूजे का स्नेह पात्र बन
बढ़ते, पलते, और पनपते !
इक झटके में गुम हो जाते
मधुर याद बनकर रह जाते !
दुनिया एक सराय अनोखी
अनगिन आते, अनगिन जाते,
आते-जाते ही रिश्तों की
सरस डोर से क्यों बँध जाते !
नीड़ त्याग नव नीड़ सजाते ?
मधुर याद बनकर रह जाते !
या फिर कारगार है दुनिया
सजा काटने ही हम आते,
जब जिसकी सजा पूरी हुई
कारावास से मुक्ति पाते !
तोड़ें बंधन फिर उड़ जाते
मधुर याद बनकर रह जाते !
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आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर शुक्रवार 30 अक्टूबर 2026 को लिंक की गयी है....
जवाब देंहटाएंhttp://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!
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बहुत बहुत आभार रवींद्र जी!
हटाएंगहरा चिंतन !
जवाब देंहटाएंस्वागत व आभार!
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