मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
गुरुवार, जून 24
समाधि
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समाधि मन के पीछे.. पीछे.. पीछे.. चलो वहाँ पर ऑंखें मींचे, जहाँ विचार न कोई उठता भाव भी कोई नहीं उमड़ता ! जहाँ प्रकाश का फूल खिला है सुर का ...
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गुरुवार, जून 17
मीरा
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मीरा नृत्य समाया हर मुद्रा में उर में वीणा की झंकार कंठ उगाए गीत मधुरिमा कहाँ छिपा था इतना प्यार ? आधी रात उजाला बिखरा नयनों में ज्...
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शुक्रवार, जून 11
सदगुरु के जन्मदिन पर
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सदगुरु तू शमा है प्यार की इक दिन रात मधुरिम जल रही दे पुकार दुलार की फिर हर बात दिल की सुन रही I तू हमें रस्ता दिखाए अमरत्व की धरे मश...
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गुरुवार, जून 10
भरी दोपहरी
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भरी दोपहरी खिले गुलाब, मालती, बेला, फुदक रहा खगों का मेला रह-रह गूंजे कलरव मद्धम, कहीं भ्रमर का अविरत सरगम I हरियाली का गांव अनो...
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मंगलवार, जून 1
ग्रीष्म की एक संध्या
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ग्रीष्म की एक संध्या छू रही धरा को शीतल ग्रीष्म की महकी पवन छा गए गगन पे देखो झूमते से श्याम घन ! दिवस की अंतिम किरण भी दूर सोने जा रही...
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शुक्रवार, दिसंबर 5
वक्त आज है खराब
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वक्त आज है ख़राब! दस हफ्तों से था जिस का इंतजार आज भी आया नहीं उस खत का जवाब वक्त आज है खराब ! जाना है जरुरी बरसे हैं बादल क्यों जाने बेहि...
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