बैसाखी की आत्मा
फसल पक गई जब खेतों में
बगिया में रस घट भर आये,
मधुर पताशों की लज्जत का
सुमिरन अंतर में हो आये !
खालिस शिष्य बनाये इस दिन
पंथ खालसा तभी कहाया,
अपने धर्म की रक्षा हेतु
हाथों में कृपाण उठवाया !
मिटा दिये थे भेदभाव सब
अनंतपुर ने दी थी साखी,
तलवार बनी, ढाल भीरु की
बन प्रेरक आयी गुरु वाणी !
लेकर पाँच विकार के पार
अन्याय का विरोध सिखाता,
बैसाखी का गीत-संगीत
गुरु गोविंद की सुध दिलाता !

बैसाखी की शुभकामनाओं सहित इस सुंदर कविता हेतु अभिनंदन आपका
जवाब देंहटाएंशुभकामनाएं
जवाब देंहटाएंye baisakhi par meri favourite rachnaaoon mein se hai!!! Thank you so much!
जवाब देंहटाएंसुंदर समयानुकूल रचना
जवाब देंहटाएंआभार