किताबें
किताबें बहलाती हैं,
भरमाती हैं
और कभी-कभी गिरते हुए को
सम्भालती भी हैं।
किताबें गुदगुदाती हैं, हँसाती है
कभी-कभी सच को छिपाकर
खेल खिलाती हैं।
किताबें तो इक इशारा हैं
चंद्रमा की तरफ़
वह चाँद नहीं हैं,
सत्य के साधक को
किताबों के भी पार जाना है,
अपने भीतर के उस आलोक की खोज में,
जहाँ वे ले जाना चाहती हैं !!
किताबें सच्चा दोस्त, सही साथी होती हैं ...
जवाब देंहटाएंsach hai!
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
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