सोमवार, जून 1

निजता

निजता 


किसी को, कुछ और नहीं होना है 

जो, जो है, वही होकर, स्वयं को संजोना है 

गुलाब, गुलाब रहकर ही महकेगा 

कमल जल में ही चहकेगा 

निजता को पहचान, उस पर महल बनाना है 

न कि किसी की अनुकृति बनने की दौड़ में 

ख़ुद को तपाना है 

जीवन हरेक के योगदान से बना है 

एक घास का तिनका भी उतना ही ज़रूरी है 

जितना आकाश में कोई वृक्ष तना है 

एक पत्थर भी नदी के तल को 

मज़बूत बनाना है 

हिमालय भी धरती की शोभा बढ़ाता है 

हर कोई अपने जैसा है,  तभी खास है 

कोई दो पत्ते भी एक से नहीं होते

जो रहते आसपास हैं !