सबके दिल की गहराई में
इक भूमि की गोद में उगते
नीम और आमों के तरुवर,
दोनों जीवन को संजोये
इक कटु, दूजा मृदु रस भरकर !
सबके दिल की गहराई में
जीवन का इक अंश छिपा है,
श्रम के कटु प्रयत्न से मिलता
स्नेहिल मृदु आँच में पका है !
दिल की गहराई में दीपक
बिन बाती बिन तेल जल रहा,
श्वासों में अहर्निशा जैसे
सहज मंत्र अनवरत चल रहा !
सुनो ध्यान से, जरा धैर्य से
पल भर ठहरो, झाँको भीतर
राह बनी जाती है ख़ुद ही
हौले-हौले चलना जिस पर !
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