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शुक्रवार, अक्टूबर 23
छू पाता है उस अखण्ड को
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छू पाता है उस अखण्ड को छंद बद्ध हो जीवन अपना गीत, सहज संगीत जगेगा, ऋतु, दिन-रात बंधे ज्यों लय में उर से भी सुर-ताल बहेगा ! सुख-दुःख, रा...
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