बैसाखी की आत्मा
फसल पक गई जब खेतों में
बगिया में रस घट भर आये,
मधुर पताशों की लज्जत का
सुमिरन अंतर में हो आये !
खालिस शिष्य बनाये इस दिन
पंथ खालसा तभी कहाया,
अपने धर्म की रक्षा हेतु
हाथों में कृपाण उठवाया !
मिटा दिये थे भेदभाव सब
अनंतपुर ने दी थी साखी,
तलवार बनी, ढाल भीरु की
बन प्रेरक आयी गुरु वाणी !
लेकर पाँच विकार के पार
अन्याय का विरोध सिखाता,
बैसाखी का गीत-संगीत
गुरु गोविंद की सुध दिलाता !


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