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शनिवार, दिसंबर 3

लघु जो भी है झर जायेगा

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लघु जो भी है झर जायेगा शाम हुई पुष्प झर जाता   पात पुराना  मुरझा जाता , निज झोली में बाँधें  गाँठें  मन  अतीत के नगमे ग...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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