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अप्राप्य
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शुक्रवार, सितंबर 7
तू अंतर को प्रेम से भर ले
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तू अंतर को प्रेम से भर ले व्यर्थ ही तू क्यों चिंता करता तेरे लिए तो मैं हूँ ना, तू अंतर को प्रेम से भर ले कुछ अप्राप्य रहेग...
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