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ईसा
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ईसा
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बुधवार, दिसंबर 25
बड़े दिन की कविता
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बड़े दिन की कविता ईसा ने कहा था चट्टान पर घर बनाओ रेत पर नहीं क्या ‘मन’ ही हमारा असली घर नहीं क्या हर कोई मन में नहीं रहता आपस में ज...
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सोमवार, दिसंबर 19
तुम धरती के नमक बनो
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तुम धरती के नमक बनो येरूशलम का बेतलेहम गाँव पूर्व दिशा में चमका तारा, मरियम-युसूफ के घर जन्मा परम पिता का पुत्र दुलारा ! हेरोदस राजा घबर...
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रविवार, जून 12
बुद्धों की कीमत न जानी
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बुद्धों की कीमत न जानी यह दुनिया की रीत पुरानी बुद्धों की कीमत न जानी, जीवित का सम्मान किया न बाद में पूजी उनकी वाणी ! ईसा को सूली पे चढा...
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शुक्रवार, दिसंबर 24
ईसा ने था यही कहा
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ईसा ने था यही कहा राज्य स्वर्ग का दिल के भीतर लिये हुए, मानव ! तुम फिरते पर जाने क्यों, हो बेखबर अहर्निश नरकों को गढ़ते ! धन्य हैं व...
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