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सोमवार, जुलाई 18

कैसा यह बंधन है !

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कैसा यह बंधन है  ! बांधा था हमने खुद को अपने ही शौक से उसने तो भागने के रस्ते सुझाये थे पिंजरे का द्वार खोल इशारे भी कर दिये उड़-उड़ क...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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