मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

गगरी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
गगरी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शुक्रवार, अगस्त 29

बादल है तो बरसेगा ही

›
बादल है तो बरसेगा ही  बादल है तो बरसेगा ही  खेत किसी का सरसेगा ही,  भरा हुआ है जो अभाव से  ऐसा मन तो तरसेगा ही ! जल अध गगरी छलकेगा ही  व्यर्...
6 टिप्‍पणियां:
सोमवार, अगस्त 3

जाने किसने निज वैभव से

›
जाने किसने निज वैभव से सुख सागर में ले हिचकोले मनवा धीरे-धीरे डोले, कहाँ से पायी मस्ती मद की राज न लेकिन कोई खोले ! ...
8 टिप्‍पणियां:
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.