मन पाए विश्राम जहाँ
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गगरी
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शुक्रवार, अगस्त 29
बादल है तो बरसेगा ही
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बादल है तो बरसेगा ही बादल है तो बरसेगा ही खेत किसी का सरसेगा ही, भरा हुआ है जो अभाव से ऐसा मन तो तरसेगा ही ! जल अध गगरी छलकेगा ही व्यर्...
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सोमवार, अगस्त 3
जाने किसने निज वैभव से
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जाने किसने निज वैभव से सुख सागर में ले हिचकोले मनवा धीरे-धीरे डोले, कहाँ से पायी मस्ती मद की राज न लेकिन कोई खोले ! ...
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