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सोमवार, अप्रैल 17

वरदानों को भूल गया मन

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वरदानों को भूल गया मन रिश्ता जोड़ रहा है कब से  पल-पल दे सौगातें  जीवन, निज पीड़ा में खोया पागल वरदानों को भूल गया मन ! ठगता आ...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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