मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
घात
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
घात
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
गुरुवार, सितंबर 20
शब्दों की सीमा बाहर है
›
शब्दों की सीमा बाहर है शब्दों से ही परिचय मिलता उसके पार न जाता कोई, शब्दों की इक आड़ बना ली कहाँ कभी मिल पाता कोई ! ...
8 टिप्पणियां:
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें