मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

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गुरुवार, जून 26

अब कैसी दूरी अंतर में

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अब कैसी दूरी अंतर में जान लिया जब भेद हृदय का  अब कैसी दूरी अंतर में,  अंतरिक्ष में ग्रह घूमें ज्यों  चंद्र-सूर्य अपने अंबर में ! उड़ना चाहे...
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शुक्रवार, जनवरी 3

आत्म सूर्य

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आत्म  सूर्य  तप में लीन है सूर्य  किसी तापस सा  अथवा  एक यज्ञ चल रहा है अनवरत  सूर्य की सतह पर ! ऊर्जाएँ बन रही हैं   बदल रही हैं  सारे ग्रह...
7 टिप्‍पणियां:
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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