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बुधवार, सितंबर 25

मिलन धरा का आज गगन से

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मिलन धरा का आज गगन से काले कजरारे मेघों का  गर्जन-तर्जन सुन मन डोले,   छम-छम बरसा नीर गगन से  मलय पवन के सरस झकोले ! चहुँ दिशा से जलद घिर आय...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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