मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
जुल्म
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
जुल्म
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
शनिवार, मई 3
बस ! अब और नहीं
›
बस ! अब और नहीं उलझ गई थी आज़ादी के वक्त समस्या वह सुलझाने वाली है एक मुल्क जो झूठ की बुनियाद पर खड़ा हुआ चूलें उसकी हिलने वाली हैं...
7 टिप्पणियां:
सोमवार, जून 6
कहाँ जा रहा देश आज है
›
अधरों पर कितने सवाल हैं आज करोड़ों आँखें नम हैं भौंचक तकती हुई निगाहें, कहाँ जा रहा देश आज है किसने दूषित कर दीं राहें ! अधरों पर कितने ...
6 टिप्पणियां:
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें