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ज्योतिर्मय
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रविवार, अगस्त 27
किसका रस्ता अब जोहे मन
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किसका रस्ता अब जोहे मन तू गाता है स्वर भी तेरे लिखवाता नित गान अनूठे , तू ही गति है जड़ काया में सहज प्रेरणा, उर में पैठे ! ...
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