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सोमवार, मार्च 31
बन जाये मन स्वयं उजास
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बन जाये मन स्वयं उजास झर जाता है कुम्हलाया पुष्प धरा पर आहिस्ता से जैसे बिखर जाती है पाँखुरी-पाँखुरी सहजता से विलग हो डा...
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