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शुक्रवार, मई 19

उड़ न पाते हम गगन में

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उड़ न पाते हम गगन  में गुनगुनी सी आग भीतर  कुनकुन सा मन का पानी,  एक आशा ऊंघती सी  रेंगती सी जिन्दगानी ! फिर भला क्यों ...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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