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शुक्रवार, अप्रैल 29
निज विलास में खोयी थी जो
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निज विलास में खोयी थी जो जग जब मुझमें ही बसता है क्या पाना क्या खोना इसका, युग बीतें जब इक पल में ही मिलना और बिछड़ना किसका ! पल-पल में घट...
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मंगलवार, अक्टूबर 19
इतिहास बार-बार दोहराता है स्वयं को
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इतिहास बार-बार दोहराता है स्वयं को मंदिर तोड़े जा रहे हैं खंडित हो रही हैं मूर्तियाँ धर्म के नाम पर अत्याचार और हैवानियत का एक बार फिर प...
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सोमवार, मई 25
साँझा नभ साँझी है धरती
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साँझा नभ साँझी है धरती दोनों के पार वही दर्शन जो दृश्य बना वह द्रष्टा है, जल लहरों में सागर में भी जो सृष्टि हुआ वह सृष्...
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सोमवार, जनवरी 5
कोई मतवाला मंजिल तक
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कोई मतवाला मंजिल तक फूल उगाये जाने किसने गंध चुरायी है सबने, स्वेद बहाया जाने किसने स्वप्न सजाये हैं सबने ! कोई मतवाल...
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