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रविवार, जून 14

दुख की तुम गाथा सुनाते

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दुख की तुम गाथा सुनाते दो दिनों के बीच में इक रात आती  रात का तुम ज़िक्र करते  दिन तुम्हारे पास था  दिन कभी गाया नहीं ! दो सुखों के बीच था इ...
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बुधवार, जून 9

नूतन तरु के गात हो रहे

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  नूतन तरु के गात हो रहे  निर्मल गंगाजल से बहते   तुम ही श्यामल घन बन बरसे,  चिन्मय ! चेतनता बन रहते  है कण-कण में गति भी तुमसे ! खो, पुनः...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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