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देना
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मंगलवार, अप्रैल 28
तू ही दाता
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तू ही दाता ‘देने’ को कुछ न रहा हो शेष जब आदमी के पास तब कितना निरीह होता है वह ! देना ही उसे आदमी बनाये रखता है मांग...
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