मन पाए विश्राम जहाँ
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द्वेष
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द्वेष
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बुधवार, अगस्त 9
कुछ दोहे
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कुछ दोहे वाणी से साथी बनें, वाणी अरि बनाये वाणी अगर कठोर है,मनस सुख ले जाये वाणी के सायक चलें, कुछ भी रहे न शेष अभी-अभी जो राग था, बन जात...
6 टिप्पणियां:
शनिवार, जुलाई 17
ध्यान
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ध्यान जब हम बोलते हैं भीतर या बाहर तो दूसरा रहता है जब चुप रहते हैं तो कोई दूसरा नहीं होता एक हो जाती है सारी कायनात जब घटता है मौन भ...
13 टिप्पणियां:
रविवार, जून 9
गंध और सुगंध
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गंध और सुगंध जब मन द्वेष के धुंए से भर जाये या भीतर कोई चाह जगे अपने को खोजने की थोड़ी कोशिश करें यह गंध कहाँ से आ रही है ...
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