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शुक्रवार, जुलाई 25

गूँज किसी निर्दोष हँसी की

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गूँज किसी निर्दोष हँसी की  खन-खन करती पायलिया सी  मधुर रुनझुनी घुँघरू वाली,  खिल-खिल करती हँसी बिखरती  ज्यों अंबर से वर्षा होती !   अंतर से ...
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बुधवार, मार्च 28

एक नगमा जिन्दगी का

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एक नगमा जिन्दगी का एक दरिया या समन्दर बह रहा जो प्रीत बनकर , बाँध मत बाँधें तटों पर उमग जाये छलछलाकर ! एक प्यारी सी हँ...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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