मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

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रविवार, नवंबर 10

गोपी पनघट-पनघट खोजे

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गोपी पनघट-पनघट खोजे सुंदरता की खान छिपी है  प्रेम भरा कण-कण में जग के ,  छोटा सा इक कीट चमकता  रोशन होता सागर तल में ! बलशाली का नर्तन अनुपम...
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बुधवार, मार्च 28

एक नगमा जिन्दगी का

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एक नगमा जिन्दगी का एक दरिया या समन्दर बह रहा जो प्रीत बनकर , बाँध मत बाँधें तटों पर उमग जाये छलछलाकर ! एक प्यारी सी हँ...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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