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नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

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रविवार, फ़रवरी 6

वासन्ती हवा

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वासन्ती हवा धूप ने पिया जब फूलों का अर्क भर गयी ऊर्जा उसके तन-बदन में.... कल तक नजर आती थी जो कृश और कुम्हलाई आज कैसी खिल गयी है... वसंत के ...
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मंगलवार, मार्च 17

आहट भर पाकर मधु रुत की

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आहट भर पाकर मधु रुत की बासंती चुनरिया ओढ़े हौले हौले से धरती पग, सरकाती पल भर ही घूँघट विस्मय से भर जाता है जग ! आहट...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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