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पल्लव
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पल्लव
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रविवार, फ़रवरी 6
वासन्ती हवा
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वासन्ती हवा धूप ने पिया जब फूलों का अर्क भर गयी ऊर्जा उसके तन-बदन में.... कल तक नजर आती थी जो कृश और कुम्हलाई आज कैसी खिल गयी है... वसंत के ...
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मंगलवार, मार्च 17
आहट भर पाकर मधु रुत की
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आहट भर पाकर मधु रुत की बासंती चुनरिया ओढ़े हौले हौले से धरती पग, सरकाती पल भर ही घूँघट विस्मय से भर जाता है जग ! आहट...
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