मन पाए विश्राम जहाँ

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सोमवार, अक्टूबर 23

शिकायत ख़ुद से भी अनजान हुई

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   शिकायत ख़ुद से भी अनजान हुई  खुद से खुद की जब पहचान हुई ज़िंदगी फ़ज़्र की ज्यों अजान हुई  जिन्हें गुरेज था चंद मुलाक़ातों से  गहरी हरेक स...
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रविवार, फ़रवरी 9

एक न एक दिन

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एक न एक दिन... जहाँ दो हैं संघर्ष जारी रहेगा जहाँ दो हैं मार-काट नहीं रुकेगी कभी दूसरे की सोच पर मार अभी अन्य के विचार की काट जहाँ ...
3 टिप्‍पणियां:
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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