मन पाए विश्राम जहाँ

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बुधवार, जनवरी 8

पाथेय

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पाथेय  जीवन की शाम आये  इससे पहले  थोड़ी सी तो मुस्कान समो लें भीतर  पाथेय पास हो अपने  तो रास्ता सहज ही कट जाएगा  राह का हर अँधेरा  ख़ुद मे...
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शनिवार, मई 15

शून्य हो पाथेय अपना

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  शून्य हो पाथेय अपना  अंतहीन है जीवन का यह सफर   इस पर थोड़ा भी कम पड़ जाता है  और ज्यादा भी काम नहीं आता  अनंत हो जिसका फैलाव  उसमें भला अल्...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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