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सोमवार, अप्रैल 29

मनुज प्रकृति से दूर गया है

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मनुज प्रकृति से दूर गया है  वृक्षों के आवाहन पर ही  मेघा आकर पानी देते,  कंकरीट के जंगल आख़िर  कैसे उन्हें बुलावा दे दें !  सूना सा नभ तपती ...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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