मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

बन्धन लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
बन्धन लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
मंगलवार, जून 9

का मना ?

›
का मना ? क्या है मन में  दो ही तो हैं यहाँ एक ‘मैं’ दूजा ‘तू’  ‘मैं’ है, तो यही कामना है   अर्थात बंधन  यदि ‘तू’ है तो मुक...
6 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, दिसंबर 16

दृष्टि धूमिल मोहित है मन

›
दृष्टि धूमिल मोहित है मन   किसी-किसी दिन झूठ बोलता लगता दर्पण नयन दिखाते वही देखना चाहे जो भी मन ! दृष्टि धूमिल मोहित है मन  ...
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.