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बुधवार, जून 29
भीतर दोनों हम ही तो हैं
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भीतर दोनों हम ही तो हैं बाहर जितना-जितना बांटा भीतर उतना टूट गया, कुछ पकड़ा, कुछ त्यागा जिस पल भीतर भी कुछ छूट गया ! यह निज है वह नही है ...
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