मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
रूह
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
रूह
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
बुधवार, मई 17
किताब ज़िंदगी की
›
किताब ज़िंदगी की मुस्कुराओ कि अभी ज़िंदा हो आख़िर किस बात पर शर्मिंदा हो हाथ थामा है जब उसने आगे बढ़कर, परवाज़ लगाओ मानो कोई परिंदा हो...
10 टिप्पणियां:
मंगलवार, जून 25
गीत कोई कसमसाता
›
गीत कोई कसमसाता नील नभ के पार कोई मंद स्वर में गुनगुनाता , रूह की गहराइयों में गीत कोई कसमसाता ! निर्झरों सा कब बह...
11 टिप्पणियां:
सोमवार, अगस्त 5
ओट में पर्दे की बैठे
›
ओट में पर्दे की बैठे दिल पे कितना बोझ धारे चल रहे हम कुछ तमन्नाएँ अधूरी आरजू जो हुई न पूरी कुछ पूरानी दास्तानें अनपढ़...
10 टिप्पणियां:
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें