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मंगलवार, फ़रवरी 16

ताल-लय हर हृदय प्रकटे

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ताल-लय हर हृदय प्रकटे  गा रही है वाग देवी   गूँजती सी हर दिशा है,  शांत स्वर लहरी उतरती  शुभ उषा पावन निशा है ! श्वेत दल है कमल कोमल  श्वेत ...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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