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सोमवार, जून 1

एक जागरण ऐसा भी हो

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एक जागरण ऐसा भी हो  संसार के होने का यही ढंग है  यहाँ कहीं विषाद कहीं उमंग है  चिताएँ जलती हैं जहाँ  निकट ही उत्सव मनता है  ...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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