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शुक्रवार, अप्रैल 29

निज विलास में खोयी थी जो

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निज विलास में खोयी थी जो जग जब मुझमें ही बसता है  क्या पाना क्या खोना इसका,  युग बीतें जब इक पल में ही मिलना और बिछड़ना किसका !  पल-पल में घट...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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