मन पाए विश्राम जहाँ
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विशाल
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मंगलवार, दिसंबर 13
राग प्रीत का जो साधा था
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राग प्रीत का जो साधा था है विशाल, अनन्त, अनूठा कैसे लघु मन उसको जाने शिखर चाहता भय खाई से सीमा स्वयं की, यह न माने ! ...
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