मन पाए विश्राम जहाँ

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मंगलवार, दिसंबर 13

राग प्रीत का जो साधा था

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राग प्रीत का जो साधा था   है विशाल, अनन्त, अनूठा  कैसे लघु मन उसको जाने  शिखर चाहता भय खाई से  सीमा स्वयं की, यह न माने ! ...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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