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रविवार, नवंबर 3

शांतता

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शांतता  आज हम थे और सन्नाटा था  सन्नाटा ! जो चारों और फैला था  बहा आ रहा था न जाने कहाँ से  अंतरिक्ष भी छोटा पड़ गया था जैसे  शायद अनंत की ब...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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