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गुरुवार, फ़रवरी 5

शाहों का शाह था

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शाहों का शाह था  अपनी ही छाया से अक्सर डर जाता  उससे बढ़ भीरु कोई नजर नहीं आता    सपनों पर भरोसा करे आँख मूँद कर सत्य से हमेशा दूर-दूर भाग ज...
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शुक्रवार, दिसंबर 27

शाहों का शाह था

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शाहों का शाह था   अपनी ही छाया से अक्सर डर जाता है भीरु उससे बढ़ कोई नजर नहीं आता है स्वप्न पर विश्वास करे जो आँख मूंद कर सत्...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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