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गुरुवार, फ़रवरी 3

इसलिए कुछ ठंड ज्यादा आज है

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इसलिए कुछ ठंड ज्यादा आज है शीत लहरी है कंपाती हाड़ को कटकटाते दांत जब पाला पड़े, शाम से पहले धुंधलका छा गया सूर्य निकले सर्दियों में दिन चढ़...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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