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संसृति
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मंगलवार, अगस्त 24
थिर शांत झील में
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थिर शांत झील में दूर कहीं जाना नहीं निज गाँव आना है संसृति को निहारा ध्यान अब जगाना है खुद को बचाया सदा जीवन के खेल में भेद सभी खुल ग...
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