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मंगलवार, अगस्त 24

थिर शांत झील में

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थिर शांत झील में  दूर कहीं जाना नहीं  निज गाँव आना है  संसृति को निहारा  ध्यान अब जगाना है  खुद को बचाया सदा  जीवन के खेल में  भेद सभी खुल ग...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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