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बुधवार, मार्च 16
नन्हा सा यह दिल बेचारा
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नन्हा सा यह दिल बेचारा एकाकी पर नहीं अकेला अंतर में सबके इक मेला, इक आवाज सदा गूंजती जो करती है ठेलमठेला ! रुकते-रुकते फिर चल पड़ता गिरते-ग...
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